YJSS युवा जन सेवा संघ ?

युवा जन सेवा संघ, ब्रह्मपुरी, जयपुर। एक ऐसा युवा संगठन जिसने दी है स्‍थानीय युवा वर्ग को एक दिशा। आज के भौतिक युग में जहाँ मनुष्‍य भौतिक सुखों की चाह में उस परमतत्‍व को भुलाकर बस इधर-उधर व्‍यर्थ दौड़ रहा है, युवा जन सेवा संघ ने युवाओं को एक दिशा दी, एक लक्ष्‍य दिया, अपने व्‍यस्‍त समय से कुछ समय प्रभु स्‍मरण कर स्‍वयं को पहचानने का लक्ष्‍य।

वर्ष 1990, जब प्रभु प्रेरणा से स्‍थानीय युवाओं के मष्तिष्‍क में एक विचार ने जन्‍म लिया कि क्‍यों न इस भागती दिनचर्या से कुछ समय उस परम तत्‍व के स्‍मरण हेतु निकाला जाये जिसे सभी भूले बैठे हैं। शनिवार, दिनांक 27 अक्‍टूबर, 1990 का दिन चुना गया एक यज्ञ के प्रारम्‍भ के लिए।

स्‍थानीय रेवती चौक, छोटा अखाड़ा स्थित श्री वीर हनुमान मंदिर के प्रांगण में चंद युवा एकत्र हुए और संकल्‍प लिया कि प्रत्‍येक शनिवार सायं को मंदिर प्रांगण में संगीतमय सुन्‍दरकाण्‍ड का पाठ किया जाये। ना बिछाने को दरियां थीं, ना साज थे ना ही संगीत का ज्ञान लेकिन एक संकल्‍प था, दृढ निश्‍चय था, लगन थी। एक अपने घर से दरी ले आया, एक ने पुस्‍तकें जमा कीं, एक ने दीपक जलाया, एक ने प्रसाद की व्‍यवस्‍था की और इस तरह एक सतत श्रृंखला का आरम्‍भ हुआ।

'' मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल लेकिन, लोग जुड़ते गये कारवां बनता गया '' जी हाँ। आज का युवा जन सेवा संघ जिससे आप जुड़े हैं, चंद युवाओं द्वारा देखा गया एक ऐसा स्‍वप्‍न जो आज आपके सम्‍मुख मूर्त रूप में है। आज श्री वीर हनुमान मंदिर का भव्‍य स्‍वरूप है, पानी-बिजली की सुचारू व्‍यवस्‍था है, विभिन्‍न पुस्‍तकें उपलब्‍ध हैं, बैठने की व्‍यवस्‍था है, वाद्य यंत्र उपलब्‍ध हैं और आप जैसे लगभग 350 युवा/ बाल/ वरिष्‍ठजन एवं उनके परिवारजन जुड़े हैं सुन्‍दरकाण्‍ड पाठ की इस पावन श्रृ़खला से।

समय के साथ-साथ युवा जन सेवा संघ की गतिविधियों में अनेक आयोजनों का समायोजन हुआ है, जिनमें पौष माह में वार्षिक पौषबड़ा महोत्‍सव एवं सांस्‍कृतिक संध्‍या का आयोजन, हनुमान जयंती पर सुन्‍दरकाण्‍ड पाठ एवं विशेष श्रृंगार का आयोजन, शरद् पूर्णिमा पर भव्‍य सामूहिक पाठ एवं खीर प्रसादी का आयोजन आदि प्रमुख हैं।

सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के दौरान स्‍थानीय प्रतिभाओं का सम्‍मान तो संघ द्वारा किया ही जाता है, साथ ही राज्‍य स्‍तरीय ''वाणी रत्‍न सम्‍मान'' तथा ''कला रत्‍न सम्‍मान'' भी प्रदान किये जाते हैं। राज्‍य शासन से आमंत्रित विभिन्‍न मंत्रीगण/ सांसदगण/ विधायकगण/ स्‍थानीय पार्षदगण एवं उच्‍च अधिकारीगणों के आगमन से स्‍थानीय आधारभूत सुविधाओं का विकास भी काफी हद तक संभव हुआ है।